धर्म के मार्ग पर चलकर ही समाज और राष्ट्र का कल्याण संभव : आचार्य अरुण सती

देहरादून। धर्मपुर स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास आचार्य अरुण सती ने भगवान के 24 अवतारों का वर्णन करते हुए धर्म, भक्ति और सदाचार का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान धर्म की रक्षा, अधर्म के नाश और भक्तों के कल्याण के लिए समय-समय पर अवतार लेते हैं।
कथा के दौरान आचार्य अरुण सती ने महाभारत में भीष्म पितामह के शरशय्या प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि युद्ध के बाद युधिष्ठिर जब अपने परिजनों की मृत्यु से दुखी और धर्म को लेकर चिंतित थे, तब भीष्म पितामह ने उन्हें राजधर्म, कर्तव्य, सत्य, दान और प्रजा के कल्याण का मार्ग समझाया। उन्होंने कहा कि राजा और प्रत्येक मनुष्य का प्रथम कर्तव्य धर्म के अनुसार आचरण करना तथा समाज और राष्ट्र के हित को सर्वोपरि रखना है।
आचार्य ने कहा कि भीष्म पितामह की शरशय्या से निकली ज्ञान की वाणी आज भी मनुष्य को कर्तव्य, संयम, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, मनुष्य को सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कुंती माता की स्तुति, द्रौपदी के पुत्रों के प्रसंग सहित भारत के सुंदर प्रसंगों का भी श्रवण कराया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, परोपकार और सदाचार को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
द्वितीय दिवस के यजमान परिवार में सीताराम भट्ट, गोविंद सिंह भौरियाल, शशि पाल, शकुंतला, मदन हुरला, मंजू शर्मा एवं लक्ष्मी चौहान रहे। भोग-प्रसाद में लक्ष्मी चौहान एवं भक्तों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में समिति के प्रधान सीताराम भट्ट, देवेंद्र अग्रवाल, दिनेश चमोली, दीपक शर्मा, मदन हुरला, आत्माराम शर्मा, जय प्रकाश बंसल, शरद शर्मा, प्रमोद शर्मा, सुनील कौशिक, सुचेत, सीताराम कश्यप, मंजू, शर्मिला, अर्चना ठाकुर, अन्नू, संगीता खन्ना, सुदेश सहित समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष सीताराम भट्ट ने श्रद्धालुओं से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए प्लास्टिक के पूर्ण प्रतिबंध में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने भक्तों से प्लास्टिक का प्रयोग न करने तथा मंदिर परिसर को स्वच्छ रखने का आग्रह किया।

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