नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआइ में मची रार के बीच आज निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई हैं। दरअसल, सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। आलोक वर्मा ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। आलोक ने सरकार पर जांच एजेंसी में दखलअंदाजी के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। वरिष्ठ वकील फाली एस नरीमन सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा का पक्ष रख रहे हैं। वहीं, सीवीसी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पैरवी करेंगे।इसके अलावा, घूसखोरी मामले में सीबीआइ की ओर से दर्ज एफआईएर को लेकर एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की याचिका पर भी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। अस्थाना की तरफ से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे। इससे पहले, आज सुबह राकेश अस्थाना मुकुल रोहतगी के आवास पर उनसे मिलने भी गए थे।सीबीआइ में छिड़े घमासान को लेकर विपक्षी दल भी मोदी सरकार पर हमलावर हैं। इसी सिलसिले में कांग्रेस आज देशभर में सीबीआइ मुख्यालों के बाहर प्रदर्शन कर रही है। दिल्ली में प्रदर्शन का मोर्चा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संभाल रखा है। उधर, तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस का साथ देने का एलान किया है।
आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू
आलोक वर्मा के वकील फाली एस नरीमन का पक्ष- सीबीआइ निदेशक के दो साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही क्या उन्हें हटाया जा सकता है।
सीवीसी और केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए ऑर्डर कानून के हिसाब से नहीं हैं : नरीमन
हम इसकी जांच करेंगे। हमें केवल यह देखना है कि किस तरह का अंतरिम आदेश पास किया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई
जस्टिस गोगोई ने अटॉर्नी जनरल को आदेश दिया कि जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा या पूर्व जज से कराई जाए। साथ ही, एजेंसी के अंतरिम निदेशक एम नागेशवर राव कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे।
आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना मामले में सीवीसी जांच 10 दिन में पूरी हो : जस्टिस गोगोई
जांच पूरी करने के लिए 10 दिन काफी नहीं : सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
जांच तय समय में ही पूरी होनी चाहिए और इस मामले को लटकाना नहीं चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सीवीसी के लिए आलोक वर्मा के खिलाफ जांंच करने की अवधि को 10 दिन से बढ़ाकर 15 दिन किया। 12 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।
अगली सुनवाई तक नागेशवर राव नीतिगत फैसला नहीं ले सकते। वे सिर्फ रूटीन कामकाज ही देखेंगे।