भाजपा के कुंवर प्रणव ने हरीश रावत पर तटबंध घोटाले में लिप्त होने का लगाया आरोप

देहरादून। सत्तारूढ़ दल भाजपा के खानपुर विधायक कुंवर प्रणव ने विधानसभा में अपनी ही सरकार के साथ पिछली कांग्रेस सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि करीब 34.84 करोड़ लागत से बने बालावाली खानपुर तटबंध के मात्र दो साल बाद ही ध्वस्त होने से करीब 15 हजार की ग्रामीण आबादी के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर तटबंध घोटाले में लिप्त होने और उनके विधानसभा क्षेत्र खानपुर के साथ बदले की भावना के साथ काम करने का आरोप लगाया। इस तटबंध के साथ ही सोलानी नदी पर प्रस्तावित तटबंध निर्माण के लिए बजट प्रस्ताव की पत्रावली शासन स्तर पर लटके रहने से उत्तेजित विधायक ने सदन में अपनी ही सरकार को भी घेर लिया। बाद में सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उक्त दोनों योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले धनराशि जारी की जाएगी।

उधर, विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने जिस अंदाज में हरीश रावत को निशाने पर लिया, उसे विपक्ष कांग्रेस और सत्तापक्ष भाजपा की नई तनातनी से जोड़कर देखा जा रहा है। रावत ने सरकार के खिलाफ विधानसभा के समक्ष धरने पर बैठने की घोषणा की है। ऐसे में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर प्रणव के बहाने सरकार को भी परोक्ष रूप से रावत को कठघरे में खड़ा करने का बहाना मिल गया है।

पिछली कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायकों में शुमार रहे और अब खानपुर के भाजपा विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन मंगलवार को विधानसभा में अपनी सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ गरजे।

दरअसल, भोजनावकाश के बाद विपक्ष की गैर मौजूदगी में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पीठ ने कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के उक्त प्रस्ताव को नियम-51 में चर्चा के लिए मंजूरी दे दी। सरकार के खिलाफ अपने प्रस्ताव में विधायक कुंवर प्रणव ने गंगा नदी और सोलानी नदी पर तटबंध निर्माण मामले में घोटाले का आरोप लगाते हुए इसकी जांच विधानसभा की समिति से कराने की मांग की।

सदन के बाहर उन्होंने इस प्रकरण की एसआइटी जांच की मांग भी की। करोड़ों की लागत से बना तटबंध दो साल में ही टूटा विधायक ने बताया कि अपने विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ से गांवों को बचाने के लिए वर्ष 2013-14 में हरिद्वार जिले में गंगा नदी के किनारे बसे ग्रामों की आबादी व कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए करीब 34.84 करोड़ लागत की तटबंध योजना को मंजूरी मिली थी।

उन्होंने कहा कि उक्त तटबंध बना, लेकिन महज दो साल में ही यह टूट चुका है। इससे ग्रामीण आबादी फिर खतरे की जद में है। इसीतरह सोलानी नदी के बाएं तट पर बाढ़ सुरक्षा कार्य की केंद्रपोषित 22.60 करोड़ लागत से योजना को भी मंजूरी मिली थी लेकिन इस योजना में घपला किया गया। तटबंध को अधूरा छोड़ दिया गया।

उन्होंने दोनों योजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। साथ ही उक्त योजनाओं में तकनीकी सलाहकार समिति और आइआइटी रुड़की की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने आइआइटी रुड़की में निर्माण कार्य को संतोषजनक बताए जाने पर सवाल दागे।

विधायक ने मौजूदा सरकार पर भी उक्त तटबंधों के निर्माण कार्यो में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उक्त निर्माण कार्यो की पत्रावलियां शासन में चक्कर काट रही हैं। अगली बरसात से पहले उक्त तटबंध नहीं बने तो हजारों ग्रामीणों के जानमाल पर बन आएगी और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचेगा।

जवाब में सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उक्त योजनाओं के लिए सरकार धन की व्यवस्था जल्द करेगी। उधर, विधायी व संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि उक्त तटबंधों के मामले में शासन के अधिकारियों के जवाब से विधायक कुंवर प्रणव खुश नहीं थे। इस वजह से पीठ से उन्हें नियम-51 के तहत मामला उठाने की अनुमति मिली।

प्रणव के बहाने हरीश रावत पर निशाना 

उधर, कुंवर प्रणव सिंह के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत पर हमले के सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। हरीश रावत विधानसभा सत्र के दौरान किसानों खासतौर पर गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की मांग को लेकर विधानसभा के सामने उपवास व धरने पर बैठेंगे। उनके उपवास पर बैठने से पहले ही उनके धुर-विरोधियों में शुमार खानपुर विधायक कुंवर प्रणव ने तटबंध पर घोटाले और निर्माण कार्य अधूरा छोड़े जाने के मुददे पर उन पर हमला बोल दिया।

रावत को हरिद्वार संसदीय सीट से भी कांग्रेस की ओर से दावेदार माना जा रहा है। 14 फरवरी को रुद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली भी है। प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनाव के दौरान भी पिछली कांग्रेस सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा था। सूत्रों की मानें तो भाजपा ने कुंवर प्रणव के बहाने हरीश रावत और पिछली कांग्रेस सरकार को निशाने पर लेने की तैयारी की रणनीति को ध्यान में रखा है।

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