देहरादून। उत्तराखंड में ड्रग्स कारोबार का काला सच किसी से छिपा नहीं है। ‘ड्रग्स मुक्त राज्य’ के संकल्प के बीच नशे का कारोबार तेजी से बढ़ा है। इस बात का अंदाजा वर्ष 2019 के 11 माह में 10 करोड़ 42 लाख 14944 रुपये की मादक पदार्थों की बरामदगी से लगाया जा सकता है।
कई वर्ष की कार्रवाई के बावजूद नशे के सौदागर उत्तराखंड ही नहीं उत्तर प्रदेश के बरेली, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, हिमाचल प्रदेश और पंजाब आदि हिस्सों से ड्रग्स की तस्करी कर युवाओं की रगों में जहर घोलने में लगे हैं। पंजाब के बाद उत्तराखंड ड्रग्स को लेकर सुर्खियों में है।
नशा नेटवर्क से जुड़े लोगों की जड़ें अब इतनी गहरी हो चुकी हैं कि इनका कारोबार अब अरबों में पहुंच चुका है। सबसे ज्यादा शिकार शिक्षित वर्ग हो रहा है। इनमें भी युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। भयावह स्थिति यह है कि ऐसे भी कई परिवार हैं जिन्हाेंने इस धंधे को रोजी-रोटी से जोड़ लिया है।
नशा नेटवर्क से जुड़े लोगों की जड़ें अब इतनी गहरी हो चुकी हैं कि इनका कारोबार अब अरबों में पहुंच चुका है। सबसे ज्यादा शिकार शिक्षित वर्ग हो रहा है। इनमें भी युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। भयावह स्थिति यह है कि ऐसे भी कई परिवार हैं जिन्हाेंने इस धंधे को रोजी-रोटी से जोड़ लिया है।